February 5, 2026

शिवराज सिंह सरकार की उदासीनता का परिणाम है कि प्रदेश का पत्रकार असुरक्षित
भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार पत्रकारो की सुरक्षा उनके कल्याण के प्रति कितनी सजक है,इसका प्रमाण पिछले 2
माह में सूचना का अधिकार अधिनियम में लगाए गए आवेदनों के जवाबो से पता चला।

गौरतलब हो कि प्रेस क्लब ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट के माध्यम से अप्रैल 2020से अक्टूबर2021तक लगभग एक दर्जन पत्रकार सुरक्षा कानून सहित गैर अधिमान्य पत्रकारों की समस्याओं के निराकरण हेतु मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव,राज्यपाल सहित जनसंपर्क आयुक्त,संचालक को ज्ञापन,आवेदन लिखे गए गए। संगठन के माध्यम से पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को दिए ज्ञापन पर उनके द्वारा शिवराज सरकार को पत्र लिखे,परंतु कोई कारवाही नही हुई।जब इस संबंध में संगठन द्वारा आरटीआई लगाकर जानकारी मांगी गई तो मुख्यमंत्री सचिवालय,सामान्य प्रशासन विभाग, गृह मंत्रालय,विधि मंत्रालय द्वारा जनसंपर्क संचालनालय की और पत्र अग्रेषित कर इति श्री कर ली।

संगठन द्वारा जब जनसंपर्क विभाग में आरटीआई लगाकर जानकारी मांगी तो लोक सूचना अधिकारी श्री मित्तल ने जानकारी न देकर यह अवगत कराया कि शासन स्तर का है लिहाजा जानकारी नहीं दी जा सकती है। शुक्रवार को। अपर संचालक जनसंपर्क श्री सुरेश गुप्ता के समक्ष अपील की सुनवाई में यह निर्णय हुआ कि लोक सूचना अधिकारी बुधवार शाम तक शेष जानकारी उपलब्ध कराएंगे।

अपर संचालक के समक्ष प्रकरण की सुनवाई में कई रोचक तथ्य उजागर हुए जिससे यह तो प्रमाणित हो गया कि सरकार जानबूझकर प्रदेश में पत्रकार सुरक्षा कानून लागू नहीं करना चाहती।यहां तक कि पूर्ववर्ती कमलनाथ सरकार द्वारा इस दिशा में किए गए निर्णय ,आदेश तक जनसंपर्क विभाग के पास नही हैं। वर्तमान में स्वयं मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के पास है जनसंपर्क विभाग परंतु उनकी ओर से निरंतर उदासीनता का परिणाम है कि प्रदेश में पत्रकार सुरक्षा कानून लागू नहीं होता।

भारत सरकार ने भी सूचना का अधिकार अधिनियम में यह जानकारी दी है कि पत्रकार सुरक्षा कानून लागू करने की शक्ति प्रदेश सरकार का विषय है वही कर सकती है। भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने 2017में पत्रकार सुरक्षा संबंधी एक गाइडलाइन जारी की थी जो सभी प्रदेश पर बाध्यकारी है परंतु सरकार उस पर भी अमल नहीं करती।

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