*इंदौर अजब है… और यहां के कुछ ‘पार्षद’ और भी गजब हैं!
इंदौरी नेताओं की एक से बढ़कर एक ‘सुगबुगाहट’ सामने आती रही है… यहां कोई अदना-सा नेता भंडारे के ‘तेल में खेल’ कर बिल्डिंग तान लेता है… तो कोई ‘सेंव-परमल-नमकीन’ के दम पर ‘दिल्ली दरबार’ तक अपनी पकड़ कर लेता है… फिलहाल एक ‘पार्षद’ का किस्सा आज ही हुए एक कार्यक्रम के चलते चर्चा में है… दरअसल, नेताजी ने अपनी ‘झांकी’ जमाने के लिए जैसे-तेसे चंदे के दम पर दो दिन का भजन आदि धार्मिक कार्यक्रम रखते हुए सड़क को पूरी तरह से घेर लिया… इतना ही नहीं, नेताजी के कार्यक्रम के चलते पुलिस चौकी के ‘द्वार’ भी बंद करवा दिए गए… मजे की बात यह है कि शुरू दिन तो ‘स्टील के बर्तनों’ ने कमाल दिखाया और क्षेत्रवासी अच्छी संख्या में जुट भी गए… लेकिन आज जब ‘भजन की धुन’ पर झुमने की बारी आई तो भजन मंडली के अलावा महज एक ही व्यक्ति कार्यक्रम में नजर आया और वे थे खुद ‘पार्षद महोदय’, जबकि सारी कुर्सियां खाली रही… हालांकि कुछ देर बाद रास्ते से आवाजाही करने वाले मजदूर ‘चाय के चक्कर’ में कुर्सी पर बैठे और चाय खत्म होने तक ‘भजनों का आनंद’ भी लिया… इसी तरह एक और पार्षद का किस्सा सामने आया है… इन नेताजी ने तो शायद ‘जुगाड़’ के अब तक के सारे रिकॉर्ड ही तोड़े और लोगों को कार्यक्रम में बुलाकर खासी भीड़ इकट्ठा तो कर ली, लेकिन जब ‘पेट पूजा’ की बारी आई तो उन्हें पता चला कि क्षेत्र में ही कहीं अन्य जगह ‘भंडारा’ हो रहा है… तो उन्होंने लोगों से कहा ‘अपना ही भंडारा है… वहां जाकर पेट पूजा कर लें..!’ एक ‘खामोश खबर’ यह भी है कि इंदौर में टेंट वाले कुछ ‘पार्षदों’ से इतने नाराज हो चुके हैं कि उन्होंने इन पार्षदों को एक ‘तसला’ तक देने से मना कर दिया, क्योंकि पिछला पेमेंट ही अब तक नहीं हुआ..!
