‘एक लोटा जल… समस्या का ये कैसा हल..?’ सीहोर वाला महाराज यानी कथावाचक पं. प्रदीप मिश्रा के आयोजन अब श्रद्धा से अधिक अव्यवस्थाओं के लिए जाने जा रहे हैं… कुबेरेश्वर धाम में लगातार हुए ‘जानलेवा हादसों’ से भी सबक नहीं लिया जाता और आज फिर अव्यवस्थाओं के चलते दो महिलाओं ने अपनी जान गंवा दी… खबरों के अनुसार, कावड़ यात्रा से ठीक पहले रुद्राक्ष वितरण के दौरान भगदड़ मची और धक्का-मुक्की में दबकर कई लोग घायल हुए तो ओमनगर, राजकोट (गुजरात) की 56 वर्षीय जसवंती बहन सहित एक अन्य महिला की जान चली गई… यह पहली बार नहीं है कि पं. मिश्रा के आयोजन में ऐसी अव्यवस्था देखने को मिली हो… खबरें बताती हैं कि पिछले चार साल के अंदर ही 6 श्रद्धालुओं की अव्यवस्थाओं के चलते मौत हो गई, तो 50 से ज्यादा घायल हुए… हैरत की बात है कि लगातार हुए इन हादसों के बावजूद ना तो आयोजकों ने कोई सबक लिया और ना ही शासन-प्रशासन ने… हादसों पर एक नजर…
* मार्च-2025 में ही हुए रुद्राक्ष महोत्सव में भी दो महिलाओं सहित एक तीन वर्षी बच्चे की मौत हो गई थी… इनमें से महाराष्ट्र के जलगांव से आए बच्चे अमोघ भट्ट ने इलाज के दौरान दम तोड़ा था, तो कार्डियक अरेस्ट के चलते दो अन्य महिलाओं की भीड़भाड़ में कार्डियक अरेस्ट से मौत होना बताई गई…
* इससे पहले 11 जुलाई 2024 में भी यहां तेज हवा के कारण पांडाल तो गिरा ही, वहीं सरिया और स्पीकर लगने से महिलाओं को चोंटें भी आईं थी, जिनमें से दो महिलाएं गंभीर घायल भी हुईं…
* वहीं 13 जुलाई 2022 को गुरु पूर्णिमा पर यहां पांडाल गिरा था, जिसमें वाबड़ीखेड़ा, कन्नौद निवासी उमा मीणा नामक महिला की मौत हुई थी, तो 15 से अधिक घायल भी हुए थे…
मालूम हो कि हर आयोजन में कुबेरेश्वर धाम में लाखों की संख्या में भीड़ उमड़ती है, लेकिन सुरक्षा और सुविधा के नाम पर किए गए इंतजाम विफल ही साबित होते हैं… फिलहाल आज जो हादसा हुआ उसमें मानवाधिकार आयोग ने संज्ञान लिया है और प्रशासन से जवाब तलब किया है… सवाल यह है कि लगातार हो रहे हादसों के बावजूद आयोजक और प्रशासन अपनी जवाबदेही क्यों नहीं समझता..? अगर उमड़ते श्रद्धा के सैलाब को उचित तरीके से अब भी नहीं संभाला गया तो यह किसी त्रासदी के रूप में तब्दील हो सकता है… वहीं रुद्राक्ष महोत्सव के दौरान इंदौर-भोपाल रोड पर लम्बे-लम्बे जाम की समस्याएं हर बार बनी ही रहती है..!
